Sushant Singh Rajput

क्यूँ….सुशांत? (Why… Sushant?)

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput), बॉलीवुड का एक चर्चित नाम। एक उम्दा अभिनेता और एक खूबसूरत इंसान। आज अपने पीछे सैकड़ों सवाल छोड़ कर दुनिया से विदा ले गया। यूं तो सुशांत मेरे पसंदीदा अभिनेताओं में से नहीं थे। पर यकीनन वो एक बेहतरीन अभिनेता थे। वो खूबसूरत थे, कामयाब थे, अच्छे पढ़े-लिखे थे। फिर भी उन्होने मात्र 34 वर्ष की आयु में अपनी जान ले ली। पुलिस और मीडिया कहती है कि वो पिछले 6 माह से अवसाद के शिकार थे। दिल भर-भर आता है, हर बार। सुशांत की तस्वीरें देख कर, टीवी और सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियोज़ देख कर। एक अजीब सी तकलीफ़ हो रही है। कौन जाने क्या वजह रही होगी और ना जाने आगे चल कर इस मामले में कौन सा नया रुख़ सामने आएगा। ना जाने कौन क्या कहानी पेश करेगा। अब सुशांत की निजी जिंदगी के चिथड़े उड़ाए जाएंगे। अब ना जाने कितने दिन हर रोज़ उनके पिता और परिवार को बार-बार इस दुख का सामना करना होगा।

21 जनवरी 1986 को पटना बिहार में पैदा हुये सुशांत बॉलीवुड की एक चर्चित हस्ती ही नहीं बल्कि एक नर्तक, टीवी कलाकार, एक व्यवसायी और एक समाज सेवी भी थे। सुशांत को उनकी पहली पहचान ज़ी टीवी के मशहूर सीरियल “पवित्र रिश्ता” से मिली जो वर्ष 2009 से 2011 के बीच प्रसारित हुआ। उसके बाद 2013 में उन्होने अपनी पहली फिल्म “काई पो छे” से बॉलीवुड में नाम कमाया। राजपूत ने उसके बाद “शुद्ध देसी रोमांस”, “ब्योम्केश बक्शी”, “पी.के.”, “एम.एस.धोनी: दि अंटोल्ड स्टोरी”, “केदारनाथ” और फिर 2019 में आई उनकी अंतिम फिल्म “छिछोरे” में काम किया था। उनकी आखिरी फिल्म का थीम ही यही थी कि जिंदगी से हारना नहीं है और आत्महत्या समस्याओं का हल नहीं है। पर संभवतः सुशांत अपने जीवन में ही ये लागू नहीं कर पाये। ऐसा शायद मुझे ही लगता है या किसी और ने भी ध्यान दिया हो पर सुशांत अपनी अंतिम फिल्म में सिर्फ़ किरदार नहीं निभा रहे थे वो असल में थके और टूटे हुए दिख रहे थे।

सुशांत की उपलब्धियों की सूची बहुत लंबी है। उन्होने बॉलीवुड में अनेकों सम्मान पाये हैं। चूंकि वो एक समाजसेवी भी थे, भारत सरकार के नीति आयोग ने उन्हें Women Entrepreneurship Platform (WEP) का प्रचार करने और बढ़ावा देने का उत्तरदायित्व भी सौंपा था। इसके साथ ही वो Sushant4Education जैसे प्लैटफ़ार्म से भी जुड़े थे जो नौजवान छात्रों की पढ़ाई के साधनों के लिए कार्य करता है।

आज मुंबई के बांद्रा स्थित अपने मकान में उन्होने पंखे से लटक कर अपनी जान ले ली। उनके शरीर का पोस्ट मार्टम होगा और धीरे-धीरे कुछ प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे। पर ये शायद ही पता लग पाये कि आखिर वो कौन सा पल, कौन सी तकलीफ़, कौन सा विचार इतना भयानक था जो उनका मस्तिष्क शून्यावस्था में गया और उन्हें अपने जीवन के प्रति मोह समाप्त हो गया। अवसाद एक धीमा ज़हर है। धीरे-धीरे इंसानी दिमाग को खोखला करता जाता है।

संसार में लगभग हर व्यक्ति कभी ना कभी अवसाद का शिकार होता है। कुछ उससे बाहर निकल आते हैं, कुछ उसमें घुलते रहते हैं, कुछ ठीक हो जाने का दिखावा करते हैं तो कुछ या कहना चाहिए बहुत सारे अपनी जान ले लेते हैं। पर अपनी जान ले लेने वाला कायर नहीं होता। यकीन मानिए अपनी जान ले लेना सरल नहीं होता। मैंने भी अवसाद का एक बहुत लंबा दौर देखा है और मैं उससे अकेले ही लड़ी हूँ। कहने के लिए बहुत लोग होते हैं जिनसे आप बात कर सकते हैं पर आपकी बात समझ पाने वाले ना के बराबर होते हैं। मैं भी अनेकों बार इस विचार से दो चार हुयी हूँ कि अपनी जान ले लेने से सारा दुख मिट जाएगा। संभवतः एक बार मैंने प्रयास भी किया था। पर जैसा मैंने ऊपर लिखा अपनी जान ले लेना कायरता नहीं साहस का काम है और ये साहस मैं जुटा नहीं पायी। मेरे दिमाग में एक साथ कई विचार उथल-पुथल मचाते रहे और वो शून्यावस्था में कभी नहीं गया। इसीलिए मैं आज भी हूँ। पर मैं ये नहीं कह सकती कि मैंने अवसाद पर विजय पा ली है। मैं इससे जूझती हूँ और जूझती रहती हूँ। अनेकों लोग हर रोज़ जूझते हैं। किसी के पास कुछ ना होने का अवसाद है तो किसी के पास सब कुछ होने के बाद भी अवसाद है। अवसाद या डिप्रेशन (Depression) की असल वजह किसी को नहीं पता।

इससे पहले हमने गुरु दत्त साहब (ऐसा कहा जाता है कि शायद उन्होने आत्महत्या की), परवीन बॉबी, जिया खान और सिल्क स्मिता जैसी चर्चित हस्तियों को भी अवसाद की बलि चढ़ते देखा है। 2020 का ये साल हमसे ना जाने क्या-क्या ले जाएगा। भूख से, कंगाली से, बीमारी और कोरोना से मरने वालों की गिनती हर रोज़ बढ़ रही है। ऐसे में जब सुशांत जैसे सम्पन्न युवा की आत्महत्या की ख़बर आती है तो जीवन के प्रति निराशा और बढ़ जाती है।

वर्ष 2020 का ये इतवार बॉलीवुड (bollywood) के इतिहास का एक और काला दिन माना जाएगा। सुशांत ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शांति और मुक्ति दे। तुम जब अगली बार इस धरती पर आओ तो इससे कहीं अधिक मानसिक बल ले कर आना।  

अस्वीकरण: (सुशांत की अत्महत्या के मामले में ऊपर लिखी हुई प्रत्येक बात फिलहाल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सूचना के आधार पर लिखी गयी है। आगे चल कर सूचना में नए परिवर्तन भी हो सकते हैं)

1 thought on “क्यूँ….सुशांत? (Why… Sushant?)”

  1. ॐ शांतिः ॐ सुशांत की आत्मा को शांति प्राप्त हो और उसके पिता को दारुण दुःख सहने की शक्ति मिले

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